Best 150+ Mohsin Naqvi Shayari in Hindi | मोहसिन नक़वी शायरी 2025
Mohsin Naqvi Shayari: मोहसिन नक़वी शायरी उर्दू अदब की दुनिया का एक ऐसा ख़ूबसूरत अध्याय है, जिस में मोहब्बत, दर्द, तन्हाई और इंसानियत के जज़्बात को इस तरह पिरोया गया है कि हर शेर दिल को छू जाता है। उनकी शायरी में इश्क़ की नज़ाकत भी है और ज़िंदगी की तल्ख़ हक़ीक़तें भी।
मोशिन नक़वी के कलाम में वो असर है जो हर सुनने वाले को सोचने पर मजबूर कर देता है, कभी अश्कों में भीगने को, तो कभी मुस्कुराने को। अगर आप भी ऐसे अशआर की तलाश में हैं जो दिल की गहराइयों तक उतर जाएँ, तो मोशिन नक़वी की शायरी आपके लिए एक अनमोल खज़ाना साबित होगी।
Mohsin Naqvi Shayari

देखे जाते न आँसू मेरे जिस से मोहसिन
आज हँसते हुए देखा उसे अग़यार के बीच !!
वो कहते हैं मोहब्बत ज़हर है मोहसिन
हमने पिया तो अमृत लगने लगा !!
अब किसके नाम करूँ ये दर्द-ए-बेकरारी को
वो जो मेरा था, वही मेरा नहीं रहा !!
मोसम ज़र्द मिन एक दिल को बचाऊं कैसे?
ऐसी रुत में तो घने पेड़ भी झड़ जाते हैं !!
कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया !!
Ghazal Mohsin Naqvi Shayari in Hindi

तू इश्क़ है तो मेरा इम्तिहान क्यों लेता है
मैं आग हूँ, तू मुझे धुआँ क्यों देता है !!
ज़ख्म भी तेरे दिए हुए हैं दवा भी तू ही है
अब तो जीना भी तुझसे है और मरना भी तू ही है !!
मेरे शहर के लोग भी कितने अजीब हैं मोहसिन
लहू से भीगे दामन पर दाग़ ढूँढते हैं !!
कभी तो सोच लिया करो हमारे बारे में
हम भी ज़िंदा हैं तेरी यादों के सहारे में !!
अज़ल से क़ाईम हैं दोनों अपनी ज़िदो पे मोहसिन
चले गा पानी मगर किनारा नहीं चले गा !!
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Mohsin Naqvi Shayari in Hindi

कल थके हरे परिन्दों ने नसीहत की मुझे
शाम ढल जाए तो मोहसिन, तुम भी घर जया करो !!
अब तो इस तालुक़ का नाम भी न लो मोहसिन
जिसमें नफ़रत ज़्यादा और मोहब्बत कम निकली !!
कभी आँखों में आँसू हैं, कभी होंठों पे हँसी
ये ज़िंदगी भी क्या चीज़ है अजीब सी !!
शाख उरियाँ पर खिला इक फूल इस अंदाज़ से
जिस तरह ताजा लहू चमके नई तलवार पर !!
तेरी आँखों में जो डूबे उन्हें किनारा न मिले
ये मोहब्बत है जनाब इसमें सहारा न मिले !!
Deep Mohsin Naqvi Shayari

कहाँ मिले गी मिसाल मेरी सितम गारी की
के मैं गुलाबों के ज़ख्म कांटों से सी रहा हूँ !!
हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते !!
जो दे सका न पहाड़ों को बर्फ की चादर
वो मेरी बांझ ज़मीन को कपास किया दे गा !!
तेरी यादों की महक अब भी आती है
जैसे बारिश के बाद मिट्टी मुस्कुराती है !!
हर ज़ख़्म कोई ताज़ा ग़म लगता है
अब दर्द भी अपना सनम लगता है !!
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2 Line Mohsin Naqvi Shayari

यूँ देखते रहना उसे अच्छा नहीं 'मोहसिन'
वो काँच का पैकर है तो पत्थर तिरी आँखें !!
ज़िंदगी ने जो भी दिया, सबक ही था
कभी दर्द के रूप में, कभी तजुर्बे के रूप में !!
क्यों तेरे दर्द को देन तोहमत ए वेरानी दिल
ज़लज़लोन में तो भरे शहर उजड़ जाते हैं !!
सिर्फ़ हाथों को न देखो कभी आँखें भी पढ़ो
कुछ सवाली बड़े ख़ुद्दार हुआ करते हैं !!
खुली हैं आँखें मगर बदन है तमाम पत्थर
कोई बताए मैं मर चुका हूँ कि जी रहा हूँ !!
Love Mohsin Naqvi Shayari

वो जो मोहब्बत को खेल समझते हैं
कभी मोहसिन की तरह चाहकर देख लें !!
ज़िकर शब फ़राक़ से वहशत उसे भी थी
मेरी तरह किसी से मुहब्बत उसे भी थी !!
तेरी मुस्कुराहट मेरे दिल की दवा बन गई
तेरे इश्क़ की खुशबू मेरी रूह तक समा गई !!
तेरी यादों का मौसम कुछ ऐसा छाया है
हर पल दिल बस तुझमें ही समाया है !!
मोहब्बत लफ़्ज़ नहीं, एहसास बन जाती है
जब किसी की याद साँस बन जाती है !!
Sad Mohsin Naqvi Shayari

ज़हर देता है कोई, कोई दवा देता है
जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है !!
ज़िंदगी की किताब में कुछ पन्ने दर्द के हैं
और हर पन्ना पे तेरा नाम लिखा है !!
कभी तुमसे भी मिलना था मुक़द्दर में
अब बस यादों से रिश्ता निभाना है !!
हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर !!
अब तक मेरी यादों से मिटाये नहीं मिटता
भीगी हुई इक शाम का मंज़र तेरी आँखें !!
Shayari Mohsin Naqvi Shayari

अब एक पल का तग़ाफ़ुल भी सह नहीं सकते
हम अहल-ए-दिल कभी आदी थे इंतिज़ार के भी !!
इक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबब
सेहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगी !!
कितने लुफ्ज़ो के ग़ुलाफ़ों में छुपाऊँ तुझ को
शहर वाले मेरा मोज़ू सुखन जानते हैं !!
अब की बारिश में तो ये कर जियान होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे निशान होना ही था !!
तू जो रूठा तो सब कुछ अधूरा है
तेरे बिना ये जहाँ भी अधूरा है !!
