Best 80+ Zia Mazkoor Shayari in Hindi | ज़िया मज़क़ूर शायरी 2025
ज़िया मज़कूर शायरी (Zia Mazkoor Shayari) की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जो भावनाओं की गहराइयों को शब्दों की खूबसूरती से बयां करने का हुनर रखता है। उनकी शायरी में मोहब्बत की नर्मी, दर्द की तासीर और ज़िंदगी के हर पहलू का सच्चा आईना देखने को मिलता है। ज़िया मज़कूर के अल्फ़ाज़ दिलों को छू जाते हैं, चाहे वो जुदाई का एहसास हो या चाहत की मिठास, हर शेर में एक जादू सा बहता है जो दिल को सुकून देता है।
उनकी शायरी न केवल इश्क़ की बात करती है, बल्कि इंसान की रूह से जुड़ी उन भावनाओं को भी उजागर करती है, जिन्हें शब्दों में पिरोना आसान नहीं होता। आइए, पढ़ते हैं ज़िया मज़कूर की कुछ बेहतरीन शायरियाँ, जो आपके दिल को गहराई तक छू जाएँगी।
Zia Mazkoor Shayari

अब तो थोड़ा रास्ता बाकी है
इश्क़ का एक किस्सा बाकी है
मंज़िल मिले या ना मिले हमें
चलने का बस जज़्बा बाकी है !!
बोल पढ़ते हैं हम जो आगे से
प्यार बढ़ता है इस रवये से
मैं वही हूँ, यकीन करो मेरा
मैं जो लगता नहीं हूँ चेहरे से !!
हर किसी को अपनी कहानी कहनी है
हर ज़ख्म की अपनी निशानी रहनी है
ज़िया कहता है, मत डर दर्द से
इन्हीं में ज़िंदगी की रवानी रहनी है !!
तुम ने भी उन से ही मिलना होता है
जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है
तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो
ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है !!
वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए
तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए !!
Zia Mazkoor Shayari in Hindi

कभी चाँदनी रातों में तेरा नाम लिखा
कभी ख़्वाबों में तेरे होंठों पे सलाम लिखा
ज़िया ने हर लफ़्ज़ को तुझसे जोड़ा यूँ
कि हर शेर में तेरे इश्क़ का पैग़ाम लिखा !!
इश्क़ लटका रहेगा पंखे पे
लोग किस्से बनाएंगे रिश्तों के
कभी मोहब्बत का नाम देंगे
कभी इल्ज़ाम लगाएंगे वक्तों के !!
तेरे जाने के बाद सन्नाटा ही मिला
हर हँसी के बदले आहटों का सिलसिला
ज़िया ने जब ढूँढा तुझे भीड़ में कहीं
तो अपना ही साया बस साथ चला !!
एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे
तुमको नुस्खा भी लिख के दे दूंगा
ज़ख्म तो ठीक से दिखाओ मुझे !!
इस वक़्त मुझे जितनी ज़रूरत है तुम्हारी
लड़ते भी रहोगे तो मोहब्बत है तुम्हारी !!
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Mashkoor Zia Mazkoor Shayari

ज़िया-ए-मज़क़ूर पे इतरा रहे थे हम
अब वही लोग हमें नीचे उतार लेंगे !!
ये उसकी मोहब्बत है कि रुकता है तेरे पास
वरना तेरी दौलत के सिवा क्या है तेरे पास !!
जगह जगह न तअल्लुक़ ख़राब कर मेरा
तेरे लिए तो किसी से भी लड़ पड़ूँगा मैं !!
तेरी चाहत में खो गए हैं इस कदर
अब तो हर साँस तेरा नाम लेती है अक्सर !!
तेरी हँसी ने दिल को बेकरार कर दिया
तेरे इश्क़ ने हमें भी लाचार कर दिया !!
Shayari Zia Mazkoor Shayari

लोग हमारी तारीफ़ में जो रोशनी (ज़िया) करते हैं
उसी का मज़क़ूर (ज़िक्र) करके हमें नीचे उतार लेंगे !!
तेरे लफ़्ज़ों में वो असर था कि दिल ठहर गया
हर जुमले में इक नया अफ़साना उतर गया
जो कहा तूने तो लगा खुदा बोल पड़ा
ज़िया! फिर मोहब्बत का मतलब समझ गया !!
तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगती है
तेरी मौजूदगी से ही दुनिया पूरी लगती है !!
बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उसने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उसने !!
चारागर ऐ चारागर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी
पता नहीं कैसा माहौल था उसके घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी !!
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Ziya Zia Mazkoor Shayari

अब बस उसके दिल के अंदर दाखिल होना बाकी है
छह दरवाज़े छोड़ चुका हूं एक दरवाज़ा बाकी है !!
तेरे बिना अब कोई मंज़िल नहीं लगती
हर राह सूनी, हर ख़ुशी अधूरी लगती
कभी सोचा न था तू इतनी दूर जाएगा
अब तो साँस भी तेरे नाम से जुड़ी लगती !!
तुम्हें देख के लगता है खुदा भी हैरान है
इतना सुंदर बनाया, फिर दिमाग़ क्यों परेशान है?
हमसे मिलकर भी वो अजनबी सा रहा
होंठ ख़ामोश, मगर दिल गवाही दे रहा
ज़िया ने समझ लिया उस नज़र का जवाब
उसको मोहब्बत थी मगर इज़हार नहीं कर रहा !!
हवा चली तो उस की शाल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ !!
Zia Mazkoor Shayari Book

हमने तो चाहा था बस थोड़ा सुकून ज़िंदगी में
मगर हर मोड़ पर इम्तिहान लिखे गए क़िस्मत में
हँसने की कोशिश में आँसू छुपा लिए हमने
लोग कहते हैं "तुम तो बड़े मज़बूत निकले" !!
तेरे दीदार की प्यास रोज़ बढ़ती जाती है
दिल की धड़कन बस तेरा नाम गुनगुनाती है !!
तेरी तस्वीर दिल में सजाए बैठे हैं
तेरी चाहत में सब कुछ भुलाए बैठे हैं !!
वो जो कल तक मेरी दुनिया था
आज यादों में एक अफ़साना है
कितनी जल्दी बदल जाते हैं लोग
यह सबक ज़िंदगी ने सिखाया है !!
कोई कहता नहीं था लौट आओ
कि हम पैसे ही इतने भेजते थे
तुम्हारा शुक्रिया ऐ डूबती नाव
कि हम भी तैरना भूले हुए थे !!
